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जब इंडियन नेवी ने पाकिस्तान को घर में घुस के मारा: इंडियन नेवी डे की कहानी

1971 का साल था।
बांग्लादेश यानी तब के पूर्वी पाकिस्तान में पश्चिमी पाकिस्तान के हुक्मरानों के आदेश पर भीषण नरसंहार जारी था, मुक्ति वाहिनी भारतीय सेनाओं के अप्रत्यक्ष सहयोग के साथ पाकिस्तान के रक्तरंजित इरादों का जवाब देने में लगी हुई थी। बांग्लादेश को पाकिस्तान के चंगुल से आजाद कराने को कृतसंकल्पित तब की इंदिरा गांधी सरकार ने भारतीय सेनाओं को युद्ध के लिए तैयार रहने के निर्देश दे दिए थे। युद्ध का ऐलान किसी भी वक़्त हो सकता था। इसी बीच पाकिस्तान सेना के नियंत्रकों को इनपुट मिली कि भारत ने अपने पूर्वी सीमा पर फौजी ताकत बढ़ा रखी है, ऐसे में पश्चिमी सीमा पर कम सैन्य शक्ति होने का अनुमान था। और इसी अनुमान के दम पर पाकिस्तान ने 3 दिसम्बर 1971 के दोपहर भारत के कई एयरबेसों पर हवाई हमला कर दिया। पाकिस्तानी एयरफोर्स ने इसे ‘ऑपरेशन चंगेज खां’ नाम दिया और तीन अलग-अलग फॉर्मेशन में पाकिस्तान के कुल 51 बमवर्षक विमानों ने भारतीय वायु सीमा में प्रवेश किया। अमृतसर, अंबाला, आगरा, अवंतिपुर, बीकानेर, हलवारा, जोधपुर, जैसलमेर, पठानकोट, भुज, उतरलाई और श्रीनगर के एयरबेसों के साथ-साथ अमृतसर और फ़रीदकोट के डिफेंस रडार इंस्टालेशन्स को भी निशाना बनाया गया। हालांकि बिना प्लानिंग और सटीकता के किये गए इस हमले में भारत के कुछ एयरफील्डस को ही नुकसान पहुंचा, जिसे उसी रात ठीक कर लिया गया।

इस कायराना हमले को भारत की सरकार ने ‘एक्ट ऑफ वॉर’ माना और उसी शाम प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रेडियो पर देश के नाम अपने संदेश में युद्ध के ऐलान
पर मुहर लगा दी। 3 दिसम्बर की देर रात ही भारतीय एयरफोर्स ने इस हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया।

भारतीय नौसेना (Indian Navy) का हमला

तीन दिसंबर की दोपहर हुए हवाई हमले के बाद भारत ने बेहद आक्रमक रुख अख्तियार कर लिया। इसी कड़ी में दिल्ली स्थित भारतीय नौसेना मुख्यालय और पश्चिमी नेवल कमांड ने मिलकर पाकिस्तान के करांची बंदरगाह पर हमले की योजना बनाई। और इसी के साथ शुरू हुआ ऑपरेशन ट्राइडेंट।

ऑपरेशन ट्राइडेंट (Operation Trident)

भारत की ओर से हमले का नेतृत्व कर रहे थे कमांडर बबरु भान यादव और नेवी के इस ’25वीं मिसाइल बोट स्क्वाडरन’ के मारक दस्ते में शामिल थीं तीन विद्युत-क्लास मिसाइल बोट। सोवियत में बने SS-N-2B स्टिक्स सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैश आईएनएस निपात, आईएनएस निर्घट और आईएनएस वीर नाम की इन तीन मिसाइल बोटों को एस्कोर्ट करने की जिम्मेदारी थी आईएएनएस किल्टन और आईएनएस कत्चल नाम की दो अर्नाला-क्लास एंटी-पनडुब्बी जंगी जहाजो पर। इस बेड़े में आखिरी जहाज था फ्लीट टैंकर आईएनएस पोषक 4 दिसम्बर को दिन में ही ये जंगी बेड़ा कराची एयरपोर्ट से 250 नॉटिकल मिल यानी 460 किलोमीटर की दूरी पर पहुंच चुका था। पाकिस्तानी के सर्विलांस रेंज से दूर और पाकिस्तानी एयरफोर्स के बमवर्षकों के रात में हमला करने में सक्षम न होने की जानकारी से लैश भारतीय खेमा दिन ढ़लने का इंतजार कर रहा था।

शाम होते ही भारतीय विध्वंसकों ने अपनी पोजिशन ले ली और पाकिस्तानी समयानुसार रात ठीक 10 बजकर 45 मिनट पर आईएनएस निर्घट ने पाकिस्तानी बैटल क्लास डिस्ट्रॉयर जहाज पीएनएस खैबर पर पहली स्टिक्स मिसाइल दाग दी। पाकिस्तानी जहाज के सिस्टम ने इसे हवाई हमला समझ कर अपना एंटी एयरक्राफ्ट डिफेंस सिस्टम डिप्लॉय किया पर तब तक देर हो चुकी थी। थोड़ी ही देर में निर्घट ने इस जहाज पर दूसरी मिसाइल दागी जिसके इंपैक्ट के कुछ देर बाद ही ख़ैबर समंदर के गहराइयों में समा गया।

उधर आईएनएस निपात ने पाकिस्तानी सेना के लिए विस्फोटक ले जा रही कार्गो शिप एमवी वीनस चैलेंजर और उसकी एस्कॉर्ट सी-क्लास डिस्ट्रॉयर पीएनएस शाह जहां को निशाना बनाया। आईएनएस वीर ने पाकिस्तानी नौसेना के माइनस्वीपर पीएनएस मुहाफ़िज़ पर इतना सटीक हमला किया कि वो नेवल हेडक्वार्टर को आपातकालीन सिग्नल भेजने के पहले ही डूब गया।

भारतीय नौसेना यहीं नही रुकी, आईएनएस निपात करांची हार्बर की तरफ आगे बढ़ा और वहां मौजूद केमारी ऑयल स्टोरेज फील्ड पर दो मिसाइल दागे। इस हमले के बाद पूरा ऑयल डिपो कई दिनों तक जलता रहा और पाकिस्तान में ईंधन की भारी कमी हो गई। पाकिस्तान की कमर तोड़ने के बाद भारतीय नौसेना के रण-बांकुरे नजदीकी भारतीय बंदरगाहों पर लौट गए।

इसी शौर्य की अमिट कहानी की याद में भारतीय नौसेना हर साल 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाती है।

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ बताते हैं कि ये हमला इतना भयानक था कि पाकिस्तानी नेवी के बचे हुए जहाज़ और सैनिक अपनी जान बचा कर ग्वादर बन्दरगाह की तरफ भाग खड़े हुए। इस हमले से पैदा हुए खौफ़ के स्तर का अंदाजा इससे लगाइए की 6 दिसंबर को पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय जहाज़ समझ कर अपने ही युद्धपोत पीएनएस जुल्फिकार पर मिसाइल दाग दिए।

इस हमले के बाद 8 और 9 दिसम्बर को भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के पोर्ट्स पर पुनः हमला किया और बाद में आईएनएस विक्रांत को डुबाने के इरादे से निकले सबमरीन पीएनएस गाजी को भी समंदर में दफना दिया।

4 और 5 दिसंबर की दरम्यानी रात ओखा पोर्ट से करांची के लिए गए भारतीय दल को ऑपरेशन के उपरांत कई इनामों से नवाजा गया। ऑपरेशन के नेतृत्वकर्ता कमांडर बबरु भान यादव को महावीर चक्र और आईएनएस निपात, निर्घट और वीर के कमांडर्स को वीर चक्र प्रदान किया गया। बिनी किसी क्षति के किया गया ये ऑपरेशन आधुनिक दौर में भी विश्व की नौसेनाओं के लिए एक मिसाल है।

आज भारतीय नेवी विश्व के अग्रणी नौसेनाओं में सुमार होती है। भारतीय नौसेना दिवस पर हमारे नौसैनिकों को नमन। अरब सागर में 4 दिसम्बर की रात भारतीय जहाजों के पराक्रम का इतिहास हर भारतीय को सदियों तक गौरवान्वित करता रहेगा।


ihoik.com के लिए आशीष रंजन की रिपोर्ट